पारिभाषिक शब्दावली से आप क्या समझते हैं? हिन्दी में पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के इतिहास का उदाहरण सहित मूल्यांकन कीजिए। (UPSC 2018, 20 Marks, )

Theme: हिन्दी पारिभाषिक शब्दावली का इतिहास और मूल्यांकन Where in Syllabus: (Linguistics and Language Development)
पारिभाषिक शब्दावली से आप क्या समझते हैं? हिन्दी में पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के इतिहास का उदाहरण सहित मूल्यांकन कीजिए।

Introduction

पारिभाषिक शब्दावली का तात्पर्य उन शब्दों से है जो विशेष क्षेत्रों में विशिष्ट अर्थ रखते हैं। हिन्दी में इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में आरंभ हुआ। महावीर प्रसाद द्विवेदी और रामचंद्र शुक्ल जैसे विद्वानों ने इसके विकास में योगदान दिया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने 1910 में पारिभाषिक शब्दावली के मानकीकरण की दिशा में कार्य किया। यह शब्दावली विज्ञान, तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में हिन्दी के उपयोग को सशक्त बनाती है।

हिन्दी पारिभाषिक शब्दावली का इतिहास और मूल्यांकन

 ● पारिभाषिक शब्दावली: यह विशेष शब्दों का समूह है जो किसी विशेष विज्ञान, शास्त्र या विषय के लिए प्रयुक्त होते हैं। ये शब्द अपने क्षेत्र में विशिष्ट अर्थ में परिभाषित होते हैं। उदाहरण के लिए, रसायन, भौतिकी, दर्शन आदि के शब्द।  
  ● निर्माण प्रक्रिया:  
    ● विद्वान मंडली द्वारा पारिभाषिक शब्दों का निर्माण किया जाता है।  
        ○ यह प्रक्रिया अनुवाद पर आधारित होती है, जहां अंग्रेजी शब्दों के पर्याय हिन्दी में बनाए जाते हैं।
        ○ उदाहरण: अफीम के लिए अहिफंन, सीमेंट के लिए वज्रधातु
  ● ग्रहण:  
        ○ यदि तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी शब्द पहले से किसी धारणा का व्यक्त करने में सक्षम हों, तो उन्हें ही स्वीकार किया जाता है।
        ○ उदाहरण: कम्प्यूटर, माउस, कीबोर्ड जैसे शब्दों को स्वीकार किया गया।
  ● संचयन:  
        ○ भारतीय भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों के उपयुक्त शब्दों का संचय पारिभाषिक शब्द के रूप में किया जाता है।
        ○ उदाहरण: भरपाई, भुगतान, वसूली जैसे शब्द जनभाषा से संग्रह कर पारिभाषिक बनाए गए।
  ● अनुकूलन:  
        ○ पूर्व प्रचलित शब्दों को पारिभाषिक शब्द के रूप में अनुकूलित किया जाता है।
        ○ उदाहरण: इंजन के लिए ऐंजीन, लालटेन के लिए लेन्टर्न
  ● शब्द-संग्रह:  
        ○ जन-सामान्य के बीच में प्रचलित शब्दों का संग्रह किया जाता है।
        ○ उदाहरण: भूलचूक, जोड़ना, लाभ जैसे शब्द।
  ● इतिहास और योगदान:  
        ○ भारतीय संविधान में हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति के बाद, अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी की ज्ञान विज्ञान तथा प्रशासन की शब्दावली तैयार की गई।
    ● डॉ. रघुवीर और डॉ. माई दयाल जैन जैसे विद्वानों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।  
  ● उदाहरण:  
    ● समनुमोदन, वज्रचूर्ण, कठोराकिनी जैसे शब्द बनाए गए।  
    ● अफीम के लिए अहिफंन और सीमेंट के लिए वज्रधातु जैसे शब्द प्रचलन में नहीं आ पाए।  
  ● महत्व:  
        ○ पारिभाषिक शब्दावली ने हिन्दी को ज्ञान, विज्ञान, प्रशासन, वाणिज्य और जनसंसार की भाषा बनने का गौरव प्रदान किया है।
        ○ यह हिन्दी की सम्मान वृद्धि में सहायक सिद्ध हुई है।

Conclusion

पारिभाषिक शब्दावली का अर्थ विशेष क्षेत्रों में प्रयुक्त शब्दों का संग्रह है। हिन्दी में इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में आरंभ हुआ। महात्मा गांधी और राजा राममोहन राय ने इसे बढ़ावा दिया। संस्कृत से शब्द ग्रहण कर इसे समृद्ध किया गया। आज भी तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में इसकी आवश्यकता है। डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा था, "भाषा का विकास समाज का विकास है।" आगे बढ़ने के लिए हमें शब्दावली को समकालीन संदर्भों में अद्यतन करना होगा।